The Ten Commandments

The Ten Commandments are recorded in chapter 20 of Exodus and in chapter 5 of Deuteronomy. The Old Testament calls them “the words of the covenant” (Exod 34:28) and “the ten words” (Exod 34:28; Deut 4:13); the New Testament calls them “the commandments”, in Greek ἐντολαί (Matt 19:17; Rom 13:9). Today they are often called the Decalogue, from the Greek δέκα λόγοι, “ten words”.

The two records of the Ten Commandments are essentially the same, but they give different grounds for the Sabbath commandment: in Exodus it rests on the creation of the world, in Deuteronomy on Israel’s deliverance from slavery in Egypt.

In the New Testament Jesus and the apostles refer to these commandments more than once — to all of them except the Sabbath commandment. They speak above all of keeping them inwardly rather than outwardly and single out two chief requirements: love for God and love for one’s neighbour.

Exodus and Deuteronomy

“मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ। मैं तुम्हें मिस्र देश से बाहर लाया। मैंने तुम्हें दासता से मुक्त किया। इसलिए तुम्हें निश्चय ही इन आदेशों का पालन करना चाहिए।

“तुम्हे मेरे अतिरिक्त किसी अन्य देवता को, नहीं मानना चाहिए।

“तुम्हें कोई भी मूर्ति नहीं बनानी चाहिए। किसी भी उस चीज़ की आकृति मत बनाओ जो ऊपर आकाश में या नीचे धरती पर अथवा धरती के नीचे पानी में हो। किसी भी प्रकार की मूर्ति की पूजा मत करो, उसके आगे मत झुको। क्यों? क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ। मेरे लोग जो दूसरे देवताओं की पूजा करते हैं मैं उनसे घृणा करता हूँ। यदि कोई व्यक्ति मेरे विरुद्ध पाप करता है तो मैं उसका शत्रु हो जाता हूँ। मैं उस व्यक्ति की सन्तानों की तीसरी और चौथी पीढ़ी तक को दण्ड दूँगा। किन्तु मैं उन व्यक्तियों पर बहुत कृपालू रहूँगा जो मुझसे प्रेम करेंगे और मेरे आदेशों को मानेंगे। मैं उनके परिवारों के प्रति सहस्रों पीढ़ी तक कृपालु रहूँगा।

“तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के नाम का उपयोग तुम्हें गलत ढंग से नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति यहोवा के नाम का उपयोग गलत ढंग से करता है तो वह अपराधी है और यहोवा उसे निरपराध नहीं मानेगा।

“सब्त को एक विशेष दिन के रूप में मानने का ध्यान रखना। सप्ताह में तुम छः दिन अपना कार्य कर सकते हो। किन्तु सातवाँ दिन तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की प्रतिष्ठा में आराम का दिन है। इसलिए उस दिन कोई व्यक्ति चाहे तुम, या तुम्हारे पुत्र और पुत्रियाँ, तुम्हारे दास और दासियाँ, पशु तथा तुम्हारे नगर में रहने वाले सभी विदेशी काम नहीं करेंगे। क्यों? क्योंकि यहोवा ने छ: दिन काम किया और आकाश, धरती, सागर और उनकी हर चीज़ें बनाईं। और सातवें दिन परमेश्वर ने आराम किया। इस प्रकार यहोवा ने शनिवार को वरदान दिया कि उसे आराम के पवित्र दिन के रूप में मनाया जाएगा। यहोवा ने उसे बहुत ही विशेष दिन के रूप में स्थापित किया।

“अपने माता और अपने पिता का आदर करो। यह इसलिए करो कि तुम्हारे परमेश्वर यहोवा जिस धरती को तुम्हें दे रहा है, उसमें तुम दीर्घ जीवन बिता सको।

“तुम्हें किसी व्यक्ति की हत्या नहीं करनी चाहिए।

“तुम्हें व्यभिचार नहीं करना चाहिए।

“तुम्हें चोरी नहीं करनी चाहिए।

“तुम्हें अपने पड़ोसियों के विरुद्ध झूठी गवाही नहीं देनी चाहिए।

“दूसरे लोगों की चीज़ों को लेने की इच्छा तुम्हें नहीं करनी चाहिए। तुम्हें अपने पड़ोसी का घर, उसकी पत्नी, उसके सेवक और सेविकाओं, उसकी गायों, उसके गधों को लेने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। तुम्हें किसी की भी चीज़ को लेने की इच्छा नहीं करनी चाहिए।”

Exodus 20:2–17 · HERVपवित्र बाइबल

“मैं यहोवा तुम्हारा वह परमेश्वर हूँ जो तुम्हें मिस्र से बाहर लाया जहाँ तुम दास की तरह रहते थे।

“मेरे अतिरिक्त किसी अन्य देवता की पूजा न करो।

“किसी की मूर्तियाँ या किसी के चित्र जो आकाश में ऊपर, पृथ्वी पर या नीचे समुद्र में हों, न बनाओ। किसी प्रकार के प्रतीक की पूजा या सेवा न करो। क्यों? क्योंकि मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हूँ। मैं अपने लोगों द्वारा किसी अन्य देवता की पूजा से घृणा करता हूँ। ऐसे लोग जो मेरे विरुद्ध पाप करते हैं, मेरे शत्रु हो जाते हैं। मैं उन लोगों को दण्ड दूँगा और मैं उनके पुत्रों, पौत्रों और प्रपौत्रों को दण्ड दूँगा। किन्तु मैं उन लोगों पर बहुत दयालु रहूँगा जो मुझसे प्रेम करते हैं। और मेरे आदेशों को मानते हैं। मैं उनकी सहस्र पीढ़ी तक उन पर दयालु रहूँगा!

“यहोवा, अपने परमेश्वर के नाम का उपयोग गलत ढ़ंग से न करो। यदि कोई व्यक्ति उसके नाम का उपयोग गलत ढ़ंग से करता हो तो वह दोषी है और यहोवा उसे निर्दोष नहीं बनाएगा।

“सब्त के दिन को विशेष महत्व देना याद रखो। यहोवा, तुम्हारे परमेश्वर ने आदेश दिया है कि तुम सब्त के दिन को सप्ताह के अन्य दिनों से भिन्न करो। पहले छ: दिन तुम्हारे काम करने के लिए हैं। किन्तु सातवाँ दिन यहोवा तुम्हारे परमेश्वर के सम्मान में आराम का दिन है। इसलिए सब्त के दिन कोई व्यक्ति काम न करे, अर्थात् तुम, तुम्हारे पुत्र, तुम्हारी पुत्रियाँ, तुम्हारे सेवक, दास स्त्रियाँ, तुम्हारी गायें, तुम्हारे गधे, अन्य जानवर, और तुम्हारे ही नगरों में रहने वाले विदेशी, कोई भी नहीं! तुम्हारे दास तुम्हारी ही तरह आराम करने की स्थिति में होने चाहिए। यह मत भूलो कि तुम मिस्र में दास थे। यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर महान शक्ति से तुम्हें मिस्र से बाहर लाया। उसने तुम्हें स्वतन्त्र किया। यही कारण है कि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर आदेश देता है कि तुम सब्त के दिन को हमेशा विशेष दिन मानो।

“अपने माता—पिता का सम्मान करो। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें यह करने का आदेश दिया है। यदि तुम इस आदेश का पालन करते हो तो तुम्हारी उम्र लम्बी होगी और उस देश में जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमको दे रहा है तुम्हारे साथ सब कुछ अच्छा होगा।

“किसी की हत्या न करो।

“व्यभिचार का पाप न करो।

“कोई चीज मत चुराओ।

“दूसरों ने जो कुछ किया है उसके बारे में झूठ मत बोलो।

“तुम दूसरों की चीजों को अपना बनाने की इच्छा न करो। दूसरे व्यक्ति की पत्नी, घर, खेत, पुरुष या स्त्री सेवक, गाये और गधे को लेने की इच्छा तुम्हें नहीं करनी चाहिए।”

Deuteronomy 5:6–21 · HERVपवित्र बाइबल

How the commandments are numbered

The text holds more than ten precepts, and there is more than one way to divide it into ten commandments. The table shows which commandment each passage counts as in each tradition; a dash means the passage is not counted among the commandments, and “pre.” marks the preamble: it has no number of its own but is held to be part of the Ten Commandments.

Text Exodus Deuteronomy Septuagint Talmud Augustine Philo Catholic Lutheran Reformed
“I am the LORD thy God…” 20:2 5:6 — 1 — — 1 — pre.
“Thou shalt have no other gods before me” 20:3 5:7 1 2 1 1 1 1 1
“Thou shalt not make unto thee any graven image…” 20:4–6 5:8–10 2 2 1 2 1 — 2
“Thou shalt not take the name of the LORD thy God in vain…” 20:7 5:11 3 3 2 3 2 2 3
“Remember (keep) the sabbath day…” 20:8–11 5:12–15 4 4 3 4 3 3 4
“Honour thy father and thy mother…” 20:12 5:16 5 5 4 5 4 4 5
“Thou shalt not kill” 20:13 5:17 6 6 5 7 5 5 6
“Thou shalt not commit adultery” 20:14 5:18 7 7 6 6 6 6 7
“Thou shalt not steal” 20:15 5:19 8 8 7 8 7 7 8
“Thou shalt not bear false witness…” 20:16 5:20 9 9 8 9 8 8 9
“Thou shalt not covet thy neighbour’s house” 20:17 5:21 10 10 10 10 10 9 10
“Thou shalt not covet thy neighbour’s wife” 20:17 5:21 10 10 9 10 9 10 10
“…nor his manservant, nor his maidservant… nor any thing that is thy neighbour’s” 20:17 5:21 10 10 10 10 10 10 10
  • Septuagint — the Greek translation of the Old Testament. Its division is followed today by the Orthodox Church and by most Protestant churches, except the Lutherans.
  • Talmud — in the Jewish tradition the first commandment is the preamble, “I am the LORD thy God…”.
  • Saint Augustine follows the Jewish tradition but does not count the preamble as a commandment, and splits the last commandment, “Thou shalt not covet”, in two, following the word order of Deuteronomy.
  • Philo of Alexandria divides the text as the Septuagint does, but has “Thou shalt not kill” and “Thou shalt not commit adultery” the other way round.
  • The Catholic Church follows Augustine’s division but counts the preamble as part of the first commandment.
  • Lutherans follow Augustine’s division without the prohibition of images and take the text of Exodus as the basis.
  • Reformed churches follow the Septuagint’s division; the preamble is held to be a necessary part of the Ten Commandments and is always said together with them.